चंद्रगुप्त मौर्य भारत के ऊ पहिला 'चक्रवर्ती सम्राट' रहन, जे पूरा भारत के एक झंडा के नीचे ले अइलन। उनकर जनम लगभग 340 ईसा पूर्व में भइल रहे। आज जवना के हमनी के बिहार कहिला, ऊ ओह जमाना में मगध साम्राज्य के नाम से जानल जात रहे।
चंद्रगुप्त के सबसे बड़ ताकत रहन आचार्य चाणक्य। चाणक्य ही ऊ इंसान रहन जे एक साधारण लइका के भीतर के आग के देखलन और उनकरा के तक्षशिला ले जा के राजनीति, जुद्ध और शास्त्र के अइसन शिक्षा दिहलन कि ऊ दुनिया के सबसे बड़ योद्धा बन गइलन।
चंद्रगुप्त मौर्य मगध के गद्दी पर लगभग 24 साल (322 ईसा पूर्व से 298 ईसा पूर्व ले) राज कइलन।
ओह समय मगध के राजधानी पाटलिपुत्र (जे आज के पटना हऽ) रहे। उहाँ से ऊ अइसन शासन चलवलन कि यूनान (Greece) के राजदूत मेगास्थनीज भी देख के दंग रह गइल रहे। ऊ अपनी किताब 'इंडिका' में लिखले बाड़न कि पाटलिपुत्र नियर सुंदर और सुरक्षित शहर दुनिया में कहुँ ना रहे
चंद्रगुप्त के शासन के खास बात
- गाँव-गाँव के जुड़ाव: आज जवना के हमनी के 'सड़क' कहिला, ओकर जाल चंद्रगुप्त ओही जमाना में बिछा देले रहन। पाटलिपुत्र से लेके अफगानिस्तान ले एक बहुते लम्बा रास्ता (राजपथ) बनवाइल गइल रहे, ताकि व्यापार बढ़ सके।
- खेती-बारी पर जोर: मगध के किसानन खातिर ऊ गंगा और सोन नदी के पानी के सही इस्तेमाल करे खातिर नहर बनववलन। ऊ जानत रहन कि अगर बिहार के किसान खुशहाल रही, तबे साम्राज्य मजबूत रही।
- नगर निगम के जनम: आज के जइसन 'नगर निगम' (Municipal Corporation) होला, ओकर शुरुआत चंद्रगुप्त पाटलिपुत्र में कइले रहन। शहर के सफाई, विदेशी मेहमानन के सेवा और जनम-मरण के हिसाब रखे खातिर अलग-अलग टोली (कमेटी) बनावल गइल रहे।
मगध के अनुशासन और कानून
बिहार छोड़ के दक्षिण भारत गइलन
- राजधानी: पाटलिपुत्र (पटना)
- शासन काल: 322 BC से 298 BC
- सबसे बड़ जीत: यूनानी राजा सेल्यूकस निकेटर के हरावल और अखंड भारत बनावल।
