भोजपुरी भाषा के जन्म आ ओकर विकास के कहानी कवनो महागाथा से कम नईखे। ई खाली एगो भाषा ना हऽ, बलुक करोड़ों लोगन के धड़कन, संस्कृति आ पहिचान हऽ। आईं, आजु हमनी के 'भोजपुरी के जनम : एगो अनोखा महागाथा' पर बिस्तार से चर्चा करीं।


भोजपुरी शब्द सुनतहीं कान में एगो मिश्री जइसन घोल घुल जाएला। "का हाल बा?" कहतहीं जवन आपनपन महसूस होला, उ कवनो अउरी भाषा में नईखे। भोजपुरी के जड़ बहुत गहीर बा। ई भाषा कवनो बंद कमरा में ना, बलुक खुला खेत-खलिहान, गंगा-गंडक के तीरे आ गांव के चौपाल पर जनमल आ पल्लवित भइल बिया।

अपभ्रंश से भोजपुरी ले

भोजपुरी के जनम के इतिहास देखल जाए त ई सीधे संस्कृत से जुड़ल बा। भारत के प्राचीन भाषा संस्कृत से पाली निकलल, पाली से प्राकृत आ प्राकृत से अपभ्रंश।

विद्वान लोगन के मानल बा कि मगध क्षेत्र में जवन 'मागधी अपभ्रंश' प्रचलित रहे, ओही से पूरबी भाषा सभ के जन्म भइल। मागधी अपभ्रंश के तीन गो मुख्य शाखा भइली:

  1. मैथिली
  2. मगही
  3. भोजपुरी
भोजपुरी के नामकरण बिहार के आरा जिला के 'भोजपुर' शहर के नाम पर भइल बा। कहल जाला कि उज्जैन के राजा भोज के वंशज लोग जब इहां आके बसल, त उ लोग ई इलाका के नाम 'भोजपुर' रखल आ इहवां बोलल जाए वाली भाषा 'भोजपुरी' कहाइल।

भोजपुरी के क्षेत्र: सात समंदर पार ले

भोजपुरी खाली बिहार आ उत्तर प्रदेश के भाषा नईखे। एकर विस्तार त अब पूरा दुनिया में बा।
  • भारत में: मुख्य रूप से पच्छिमी बिहार (आरा, छपरा, सीवान, बक्सर, गोपालगंज, रोहतास) आ पूरबी उत्तर प्रदेश (बनारस, गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, गाजीपुर, बलिया) के साथे-साथे झारखंड के कुछ हिस्सा में बोलल जाला।
  • विदेश में: गिरमिटिया मजदूरन के माध्यम से ई भाषा मॉरीशस, सूरीनाम, गयाना, त्रिनिदाद आ टोबैगो, फिजी आ नेपाल ले पहुँचल। आजु मॉरीशस में त भोजपुरी के राजकीय सम्मान प्राप्त बा।

भोजपुरी साहित्य के स्वर्णिम काल

भोजपुरी के लिखित साहित्य भले बाद में आइल होखे, बाकी एकर मौखिक परंपरा बहुत समृद्ध बा।
  • कबीर दास: संत कबीर के बानी में भोजपुरी के पुट साफ झलकेला। "काहे री नलिनी तू कुमिलानी" जइसन पद में भोजपुरी के मिठास बा।
  • भिखारी ठाकुर (भोजपुरी के शेक्सपियर): भोजपुरी के आधुनिक पहचान दिलावे में भिखारी ठाकुर के सबसे बड़ हाथ बा। 'बिदेसिया', 'बेटी वियोग', 'गबरघिचोर' जइसन नाटकन के माध्यम से उ समाज के कड़वा सच के भोजपुरी में परोसले।
  • राहुल सांकृत्यायन: उहो भोजपुरी के बढ़ावा देवे में बड़ जोगदान देले।

लोकगीत आ संगीत: भोजपुरी के जान

भोजपुरी बिना गीत-संगीत के अधूरी बा। जनम से लेके मरण ले, हर अवसर खातिर इहां अलग गीत बा:
  • सोहर: लइका के जनम पर।
  • जंतसार: चक्की पीसते समय।
  • रोपनी-सोहनी: खेत में काम करते समय।
  • चइता आ फगुआ: फागुन के मस्ती में।
  • बिरहा: अहीर समाज के गौरवशाली गायन परंपरा।

भोजपुरी काहे खास बा?

  1. मिठास: 'रउआ' कह के सम्मान देवे के तरीका कवनो अउरी भाषा में अइसन नईखे।
  2. लचीलापन: ई भाषा कवनो भी शब्द के अपना अंदर समा लेवेले।
  3. संस्कार: भोजपुरी के मुहावरा आ लोकोक्ति में जीवन के दर्शन छिपल बा। जइसे- "गइल भइस पानी में " या "नाच न जाने आंगन टेढ़"।

आधुनिक दौर आ चुनौतियां

आजु भोजपुरी सिनेमा आ एलबम के माध्यम से दुनिया भर में गूँज रहल बा। लेकिन, एकरा साथे कुछ बुराई भी आइल बा। 'अश्लीलता' एगो बड़ चुनौती बन के खड़ बा। कुछ लोग पैसा खातिर भोजपुरी के गलत तरीका से पेश कर रहल बाड़े, जवना से एकर गरिमा गिर रहल बा।

लेकिन दूसरी तरफ, मनोज वाजपेयी, पंकज त्रिपाठी जइसन कलाकार आ तमाम साहित्यकार लोग एकरा के गौरव दिलावे में लागल बा।

संविधान के आठवीं अनुसूची के मांग

भोजपुरी भाषी लोगन के बहुत पुराना मांग बा कि एकरा के भारत के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल कइल जाए। जब करोड़न लोग ई भाषा बोलेला, त एकरा के संवैधानिक दर्जा मिले के ही चाहीं।

भविष्य के डगर

भोजपुरी खाली एगो बोली ना हऽ, ई एगो संस्कार हऽ। ई उ भाषा हऽ जवन माई के लोरी में बा, बाबूजी के डांट में बा, आ फगुआ के रंग में बा। भोजपुरी के महागाथा आजुओ लिखल जा रहल बा। जदि हमनी के आपन भाषा से प्यार करीं, शुद्ध भोजपुरी बोलीं आ ओकरा साहित्य के सम्मान करीं, त उ दिन दूर नईखे जब भोजपुरी दुनिया के सबसे ऊँच आसन पर बिराजमान होई।

"गर्व से कहीं कि हम भोजपुरी भाषी हईं!"

Previous Post Next Post