भोजपुरी के माटी, एकर मिठास अउर एकर गौरवशाली इतिहास के समेटले ई लेख खास आपके खातिर बा। हम कोशिश कइले बानी कि ई जानकारी रउआ सभ के मालुम पड़े 

भोजपुरी खाली एगो बोली भा भाषा ना ह, ई एगो पूरा संस्कार ह, एगो संस्कृति ह अउर करोड़ों लोगन के धड़कन ह। जब हमनी के "का हाल बा?" पूछीं ला, त ओकरा में खाली सवाल ना, बलुक अपनापन के एगो पूरा समंदर होला। लेकिन का रउआ कबहूँ सोचले बानी कि ई 'भोजपुरी' शब्द आइल कहाँ से? काहे एकरा के राजा भोज के विरासत कहल जाला? अउर कइसे ई मगध के माटी से निकल के आज मारीशस, सूरीनाम अउर फिजी ले पहुँच गइल?

आजु हमनी के भोजपुरी के जनम अउर ओकर 'रॉयल' (शाही) इतिहास के परत दर परत उघारब जा।

मिथक अउर हकीकत: का राजा भोज भोजपुरी बोलत रहन?

जहाँ तक 'भोजपुरी' नाम के सवाल बा, ई सीधे तौर पर 'भोजपुर' सहर से जुड़ल बा। बिहार के आरा जिला में एगो जगह बा 'भोजपुर'। मानल जाला कि एकरा के धार (मध्य प्रदेश) के महान परमार राजा भोज बसइले रहन।
अब सवाल ई बा कि राजा भोज त मालवा (MP) के रहन, त बिहार में उनकर नाम कइसे?
  • इतिहास के पन्ना: राजा भोज के वंशज लोग बाद में पूरब की ओर बढ़ल अउर बक्सर-आरा के इलाका में आपन गढ़ बनावल। उहे लोग 'भोजपुर' सहर के स्थापना कइल।
  • नामकरण: ओही भोजपुर सहर के आसपास जेवन भाषा बोलल जात रहे, ओकर नाम पड़ल भोजपुरी
  • विरासत: राजा भोज विद्वानन के संरक्षक रहन। उहे 'विद्वता' अउर 'ठाठ' आजुओ भोजपुरी के मुहावरा अउर कहावत में लउकेला। भोजपुरी बोले वाला आदमी चाहे फटेहाल होखे, लेकिन ओकर मिजाज हमेशा 'राजा भोज' नियर रही।

भोजपुरी के 'जेनेटिक' बनावट: कइसे भइल जनम?

भाषा विज्ञान के नजरिया से देखीं त भोजपुरी के जनम कौनों जादू से ना भइल बा। ई एगो लंबी यात्रा ह।

मागधी प्राकृत से निकसल धारा:

प्राचीन काल में मगध (बिहार) में 'मागधी प्राकृत' बोलल जात रहे। समय बीतल त ओकरा से 'अपभ्रंश' बनल। ओही अपभ्रंश के पूरबी रूप से तीन गो बहिन पैदा भइली:
  1. मैथिली
  2. मगही
  3. भोजपुरी
भोजपुरी के खास बात ई बा कि एकरा में 'मागधी' के मजबूती अउर 'शौरसेनी' (पछुआ हवा) के मिठास, दुनो के मेल बा। एही वजह से भोजपुरी में "अईनी-गइनी" जइसन क्रिया पद बा जे एकरा के दुनिया के बाकी भाषा सभ से अलग बनावेला।

सात समुंदर पार: 'गिरमिटिया' मजदूर अउर वैश्विक भोजपुरी

भोजपुरी के इतिहास तब ले अधूरा बा जब ले हमनी के उनकर बात ना करीं जे 19वीं सदी में अपना 'गाँठ में तुलसी' अउर 'मुँह में भोजपुरी' लेके परदेस गइलन।

  • कलकत्ता से पानी के जहाज: गरीब मजदूरन के गिरमिटिया बना के मारीशस, गयाना, फिजी अउर त्रिनिदाद भेजल गइल।
  • माटी के याद: ऊ लोग संगे कुछु ना ले गइल, बस अपना माटी के भाषा ले गइल। आज ओही देसन में भोजपुरी के 'राज' बा। मारीशस में त भोजपुरी के राष्ट्रीय दर्जा नियर सम्मान बा। ई राजा भोज के विरासत के ऊ विस्तार बा जेकर कल्पना कबहूँ केहू कइले ना रहे।

भोजपुरी के मिठास अउर एकर व्याकरण

भोजपुरी दुनिया के सबसे 'इकोनॉमिकल' (किफायती) भाषा ह। काहे? काहे कि हमनी के 'कम शब्द में बेसी बात' कहल जानिला।

  • सर्वनाम के जादू: हिंदी में 'आप', 'तुम' अउर 'तू' होला। भोजपुरी में 'रउआ', 'तूँ' अउर 'तें'। 'रउआ' शब्द में जेवन सम्मान बा, ऊ दुनिया के कवनो भाषा में ना मिली।
  • भाव के प्रधानता: भोजपुरी में गुस्सा जाहिर करे के होखे त अलग टोन, अउर दुलार करे के होखे त अलग। "बबुआ" शब्द में जेवन ममता बा, ओकर कवनो विकल्प नइखे।

आज के चुनौती अउर भविष्य

राजा भोज के ई विरासत आज थोड़ा संकट में भी बा। अश्लीलता अउर फूहड़ गानों के चलते लोग के लागेला कि भोजपुरी बस एतने बा। लेकिन ई गलत बा।

सच्चाई ई बा कि:

  • भोजपुरी साहित्य बहुत अमीर बा।
  • भोजपुरी के लोकगीत (चैता, कजरी, सोहर) में शास्त्रीय संगीत के गहराई बा।
  • नया पीढ़ी अब डिजिटल माध्यम से एकरा के वापस ओकर सम्मान दिलावे में लागल बा।

हमनी के का करे के चाहीं?

भोजपुरी के जनम माटी से भइल बा, एकर पालन-पोषण राजा भोज के गौरव से भइल बा, अउर एकर विस्तार भिखारी ठाकुर के कलम से भइल बा। ई भाषा हमनी के पहचान ह। एकरा के बोले में शर्म ना, बलुक गर्व महसूस करे के चाहीं।

जहिया हमनी के घर में अपना बच्चा लोग से भोजपुरी में बात करब जा, तहिया सही मायने में राजा भोज के विरासत जिंदा रही। भोजपुरी खाली एगो 'कम्युनिकेशन' के जरिया ना ह, ई हमनी के पुरखउती धन ह।

"दुनिया के कोना-कोना में जाईं, लेकिन अपना माटी के महक अउर भोजपुरी के चहक कबहूँ ना बिसराईं।"
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